comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

पीकेएल-7 : दिल्ली को हराकर बंगाल ने जीता खिताब

October 19th, 2019 22:00 IST
 पीकेएल-7 : दिल्ली को हराकर बंगाल ने जीता खिताब

हाईलाइट

  • पीकेएल-7 : दिल्ली को हराकर बंगाल ने जीता खिताब

अहमदाबाद, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। मोहम्मद नबी बक्श के सुपर-10 के दम पर बंगाल वॉरियर्स ने शनिवार को यहां ट्रांस्टेडिया स्थित एका एरेना स्टेडियम में खेले गए प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के सातवें सीजन के रोमांचक फाइनल में दबंग दिल्ली को 39-34 से हराकर पहली बार खिताब जीत लिया।

दोनों टीमें पहले हाफ में 17-17 से बराबरी पर थीं। लेकिन, बंगाल ने दूसरे हाफ में अच्छी वापसी करते हुए 39-34 से मैच जीतकर पहली बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया।

दिल्ली की टीम पहले पांच मिनट तक 7-2 से आगे थी। दिल्ली ने इसके बाद अगले मिनट में ही बंगाल को आल आउट कर 11-3 की बढ़त बना ली। अगले 10 मिनट में बंगाल ने भी वापसी कर ली और दिल्ली को ऑल आउट करके स्कोर 14-15 कर दिया। बंगाल की टीम अब मात्र एक अंक से पीछे थी और 18वें मिनट में उसने 16-16 से बराबरी भी हासिल कर ली।

इसके बाद बंगाल ने पहली बार मैच में बढ़त बना ली। लेकिन, दिल्ली ने भी एक अंक लेकर स्कोर 17-17 से बराबर कर दिया। पहले हाफ की समाप्ति तक दिल्ली के नवीन कुमार ने छह और बंगाल के मोहम्मद नबी बक्श ने सात अंक लिए। दिल्ली के लिए मेराज शेख ने इस दौरान अपने 350 रेड प्वाइंटस पूरे किए।

दूसरे हाफ के पहले पांच मिनट तक भी दोनों टीमें 19-19 से बराबरी पर थीं। लेकिन, इसके बाद बंगाल ने दिल्ली को आल आउट करके 25-21 की बढ़त बना ली। इस दौरान दिल्ली के नवीन ने इस सीजन का अपना लगातार 21वां और कुल 22वां सुपर-10 पूरा किया।

मैच समाप्त होने में अब आठ मिनट का ही समय बचा था और बंगाल की टीम ने दिल्ली को फिर से आल आउट करके 10 अंकों की महत्वपूर्ण बढ़त लेकर स्कोर 34-24 तक पहुंचा दिया।

बंगाल ने यहां लगातार अपनी बढ़त को कायम रखते हुए दिल्ली को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और 39-34 से मैच जीतकर पहली बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया।

चैंपियन बंगाल के लिए मोहम्मद नबी बक्श के सुपर टेन के अलावा सुकेश हेगड़े ने आठ अंक लिए। टीम को रेड से 22, टैकल से 10, आल आउट से छह और एक अतिरिक्त अंक मिला।

दिल्ली के लिए नवीन के 18 अंकों के अलावा अनिल कुमार ने तीन अंक लिए। टीम को रेड से 27,टैकल से तीन, आल आउट से दो और दो अतिरिक्त अंक मिले।

कमेंट करें
47bnG
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।