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पैड पहन सीधे बल्लेबाजी करने जाना मेरे खेल को सूट करता है : रोहित

पैड पहन सीधे बल्लेबाजी करने जाना मेरे खेल को सूट करता है : रोहित

हाईलाइट

  • रोहित ने कहा-पैड पहन सीधे बल्लेबाजी करने जाना मेरे खेल को सूट करता है
  • रोहित ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में बतौर ओपनर पहला शतक जड़ा

डिजिटल डेस्क, विशाखापट्टनम। टेस्ट में पहली बार सलामी बल्लेबाजी कर शतक जमाने वाले भारत के रोहित शर्मा का कहना है कि उनको पैड पहन कर सीधे बल्लेबाजी करने जाने वाला खेल सूट करता है। रोहित ने दक्षिण अफ्रीका के साथ यहां एसीए-वीसीए स्टेडियम में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के पहले दिन बुधवार को नाबाद 115 रन बनाए हैं।

वह पहली बार टेस्ट में सलामी बल्लेबाजी कर रहे हैं और पहले ही मौके पर उन्होंने शतक ठोका। यह रोहित का बतौर सलामी बल्लेबाज पहला और कुल चौथा टेस्ट शतक है। मैच के बाद रोहित ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह पैड पहन सीधा विकेट पर बल्लेबाजी करना पसंद करते हैं।

रोहित ने कहा, मेरे गेम को यह सूट करता है कि मैं पैड पहन कर जाकर सीधे बल्लेबाजी करूं। मैं पहले जब पांच या छह नंबर पर बल्लेबाजी करता था तो मैं यह नहीं कह सकता कि वह मुझे सूट नहीं किया, लेकिन सलामी बल्लेबाजी के समय आपका दिमाग एकदम तरोताजा रहता है। आपको पता है कि आपको नई गेंद खेलनी है। गेम प्लान थोड़ा आसान रहता है। छह नंबर पर आप जाते तो गेंद रिवर्स स्विंग होता है, फील्ड प्लेसमेंट अलग होती है। आपको रन सामने बनाने पड़ते हैं। मुझे लगता है कि मेरे खेल के लिए सीधा पैड पहन खेलने जाना सूट करता है।

पहले दिन हालांकि बारिश ने खेल पूरा नहीं होने दिया और आखिरी सत्र के खेल हुए बगैर दिन के खेल की समाप्ति की घोषणा कर दी गई। भारत ने चायकाल तक 59.1 ओवरों में बिना कोई विकेट खोए 202 रन बना लिए थे। तभी बारिश आ गई और चायकाल की घोषणा कर दी गई। इसके बाद भी बारिश जारी रही और खेलने लायक स्थिति न बनता देख अंपायरों ने एक सत्र पहले ही दिन का खेल खत्म करने की घोषणा कर दी। रोहित ने अपने सलामी जोड़ीदार मयंक अग्रवाल के साथ भारत को मजबूत शुरुआत दिलाई। मयंक 183 गेंदों पर 11 चौके और दो छक्कों की मदद से 84 रन बनाकर खेल रहे हैं।

पहले दिन की बल्लेबाजी पर रोहित ने कहा, हमने दोनों स्पिनरों को देखा और महसूस किया कि गेंद ज्यादा टर्न नहीं कर रही है और न ही विकेट में ज्याद उछाल है तो हमने अपने कदमों का इस्तेमाल किया। हम गेंद के पास जाकर उसे मारना चाहते थे। मैंने फिर अपना खेल खेला। आपने आज जो देखा वह मेरा खेल है। मैं ऐसे ही खेलता हूं। मैं अपने खेल पर टिका रहा। मैं और मयंक ओवरों के बीच में यही बात कर रहे थे कि हम किस तरह गैप निकालें और स्ट्राइक रोटेट करें, क्योंकि इस तरह की धीमी पिच पर स्ट्राइक रोटेट करना जरूरी है, ताकि गेंदबाज अपनी लय हासिल न कर पाए। रोहित ने अभी तक 174 गेंदों का सामना किया है और 12 चौकों सहित पांच छक्के लगाए हैं।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।