Mumbai News: जरांगे-पाटील की राज पर तल्ख टिप्पणी, फडणवीस घर पर चाय पीने आते रहे, दी पानी छोड़ने की धमकी

जरांगे-पाटील की राज पर तल्ख टिप्पणी, फडणवीस घर पर चाय पीने आते रहे, दी पानी छोड़ने की धमकी

    Mumbai News. मराठा आंदोलक मनोज जरांगे-पाटील ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के आंदोलन को लेकर दिए गए बयान पर तल्ख टिप्पणी की है। रविवार को पाटील ने कहा कि मनसे अध्यक्ष राज और शिवसेना (उद्धव) के पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे दोनों भाई अच्छे हैं। ठाकरे ब्रांड भी अच्छा है। लेकिन राज बिना कारण मराठा आंदोलन को लेकर बयान दे रहे हैं। जरांगे-पाटील ने कहा कि राज सम्मान के लिए भूखे हैं। वह चाहते हैं कि उनके घर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस चाय पीने के लिए आते रहे। भले ही उनकी पार्टी मनसे पूरी तरह से बर्बाद हो जाए। उन्होंने कहा कि साल 2009 के विधानसभा चुनाव में मनसे के 12 विधायक जीते थे। फिर ये सभी विधायक धीरे-धीरे राज को छोड़कर चले गए। उसके बाद राज मराठवाड़ा में कब आए ? राज नाशिक में ससुराल होने के कारण वहां पर 50 बार जाते हैं। लेकिन हमने तो इसको लेकर कभी राज से कोई सवाल नहीं किया? जरांगे-पाटील ने कहा कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में फडणवीस ने राज का गेम कर दिया था। उसके बाद साल 2024 के विधानसभा चुनाव में राज के बेटे अमित ठाकरे माहिम सीट से हार गए। इसके बावजूद राज हमेशा फडणवीस के करीब जाते हैं। इससे पहले गत शनिवार को पत्रकारों ने राज से ठाणे में जरांगे-पाटील के आंदोलन पर सवाल किया था। इस पर ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा था। राज ने कहा था कि मराठा आरक्षण पर सभी सवालों का जवाब उपमुख्यमंत्री शिंदे ही दे सकते हैं। क्योंकि जब शिंदे राज्य के मुख्यमंत्री थे तो वे नवी मुंबई में जरांगे-पाटील का आंदोलन खत्म कराने गए थे। उन्होंने जरांगे-पाटील की मांगों का समाधान कर लेने का दावा किया था। इसके बावजूद जरांगे-पाटील ने अनशन शुरू किया है। इसलिए उपमुख्यमंत्री शिंदे से इस बारे में पूछा जाना चाहिए।

    जरांगे-पाटील ने दी पानी छोड़ने की धमकी

    मनोज जरांगे-पाटील का अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में मराठों को दस प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन बेमियादी अनशन जारी रहा। रविवार को राज्य सरकार की ओर से जरांगे-पाटील से कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं मिला। इससे मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर गतिरोध बना हुआ है। जरांगे-पाटील ने अब सोमवार से पानी भी नहीं पीने की चेतावनी राज्य सरकार को दी है। बीते 29 अगस्त से मुंबई के आजाद मैदान में अनशन कर रहे जरांगे-पाटील की तबीयत में गिरावट नजर आ रही है। प्रदेश में मराठा समाज को दस प्रतिशत आरक्षण लागू है। मगर जरांगे-पाटील मराठों को कुनबी प्रमाणत्र देने की मांग कर रही है। जिससे उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके। इस बीच प्रदेश के जलसंसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटील की अध्यक्षता में मराठा आरक्षण के लिए गठित राज्य मंत्रिमंडल की उपसमिति की बैठक हुई। विखे-पाटील ने कहा कि जरांगे-पाटील ने हैदराबाद और सातारा राजपत्र के आधार पर मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र तत्काल देने की मांग की है, पर इसमें कानूनी पेंच है। क्योंकि हैदराबाद राजपत्र में नाम नहीं बल्कि केवल संख्या है। इसलिए इस मुद्दे पर राज्य के महाधिवक्ता के साथ बैठक के बाद जरांगे-पाटील के पास अंतिम प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहीं प्रदेश के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री राधाकृष्ण-विखे पाटील ने स्पष्ट कहा है कि मराठा समाज को ओबीसी कोटे में आरक्षण देना संभव नहीं है। दूसरी तरफ जरांगे-पाटील से आजाद मैदान में राकांपा (शरद) की सांसद सुप्रिया सुले ने मुलाकात की। सुप्रिया को आंदोलनकारियों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। हालांकि सुप्रिया ने राज्य सरकार से मराठा आरक्षण के लिए विधानमंडल का एक दिवसीय विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को मराठा आरक्षण पर सर्वदलीय चर्चा करके समाधान निकालना चाहिए। सुप्रिया ने कहा कि मैं आजाद मैदान परिसर में स्वच्छता और शौचालय की सुविधा के लिए मुंबई मनपा के आयुक्त भूषण गगराणी से बात करूंगी। इसके पहले बीते 30 अगस्त को जरांगे-पाटील से मराठों को जाति प्रमाणपत्र देने के लिए प्रक्रिया तय करने को लेकर गठित सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की थी। लेकिन यह बैठक बेनतीजा रही थी। इसके जरांगे-पाटील अनशन पर अड़े हुए हैं। गत 27 अगस्त को जरांगे-पाटील जालना के अपने गांव अंतरवाली- सराटी से मुंबई में अनशन शुरू करने के लिए निकले थे। जरांगे-पाटील जालना, छत्रपति संभाजीनगर, अहिल्यानगर, पुणे होते हुए मुंबई पहुंचे हैं।

    शिंदे ने मराठा समाज के लिए करके दिखाया - सामंत

    दूसरी तरफ प्रदेश के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने भी मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे को जवाब दिया है। सामंत ने कहा कि उपमुख्यमंत्री शिंदे ने बतौर राज्य के मुख्यमंत्री रहते हुए मराठा समाज के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। उन्होंने मराठा समाज के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, 3 हजार अधिसंख्य पद, सारथी संस्था के माध्यम से प्रत्येक जिले में छात्रावास समेत कई निर्णय लिए थे। इसलिए अब शिंदे से सवाल करने की कोई आवश्यकता नहीं है।


    Created On :   31 Aug 2025 9:07 PM IST

    Tags

    और पढ़ेंकम पढ़ें
    Next Story