Nagpur News: केरोसिन की बिक्री से दुकानों में रोजाना 50-60 नए स्टोव की मांग

केरोसिन की बिक्री से दुकानों में रोजाना 50-60 नए स्टोव की मांग
खरीदार बढ़े, पर कारीगर और सामान गायब

Nagpur News कभी हर रसोई की पहचान रहा मिट्टी के तेल (केरोसिन) का स्टोव फिर चर्चा में है। एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच शहर के कई परिवारों ने घरों में पड़े पुराने स्टोव को बाहर निकालना शुरू कर दिया है। कोई घर में पड़े पुराने स्टोव को ठीक कराने के लिए दुकानों का चक्कर लगा रहा, तो कोई नया स्टोव खरीदने बाजार आ रहा है। हालांकि, दम तोड़ चुके इस कारोबार में न तो कारीगर बचे हैं और न ही स्टोव में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बाजार में उपलब्ध है। ऐसे में लोगों के सामने अजीब स्थिति है कि केरोसिन तो मिल सकता है, पर उसे जलाने के लिए स्टोव कहां से लाएं।

समय के साथ कारोबार ठंडा : 1990-2000 के दशक में शहर के इतवारी, गांधीबाग और सीताबर्डी में स्टोव दुकानों की भरमार हुआ करती थी। सैकड़ों दुकान और कारीगर हुआ करते थे। समय के साथ इसका कारोबार ठंडा हो गया। वर्तमान में इक्का-दुक्का दुकानों पर ही बमुश्किल स्टोव का निर्माण, बिक्री और रिपेयर का काम होता है। एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के कारण अब हर रोज 50-60 ग्राहक नए स्टोव की खरीदी करने दुकान पहुंच रहे हैं।

पार्ट्स भी नहीं मिल रहे : नए स्टोव के आलावा, पुराने स्टोव रिपेयर में लगने वाले छोटे पार्ट्स जैसे नोजल, पंप रबर, पाइप और अन्य सामान भी बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। पहले यह सामान स्थानीय बाजार में आसानी से मिल जाता था।


Created On :   31 March 2026 2:47 PM IST

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