Nagpur News: महंगी बिजली से मिहान में निवेश को झटका,12 प्रति यूनिट तक बढ़ाये जा सकते है बिजली के दाम

महंगी बिजली से मिहान में निवेश को झटका,12 प्रति यूनिट तक बढ़ाये जा सकते है बिजली के दाम
  • निवेश आकर्षित के बजाय उद्योगों पर बढ़ाया जा रहा बिजली का बोझ
  • दो साल में करीब 19% तक टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव

Nagpur News देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विकसित किए गए मल्टी-मॉडल इंटरनेशनल हब एंड एयरपोर्ट एट नागपुर (मिहान) में अब उद्योगों पर बिजली का अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी है। महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (एमएडीसी) ने दो वर्षों में बिजली टैरिफ में करीब 19% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) के समक्ष रखा है। मौजूदा वित्त वर्ष (2026-27) में बिजली की कीमतों को 5.60 रुपए प्रति यूनिट बढ़ाया जाना है। एक तरफ मिहान में पहले ही नए निवेशक आने से हिचकिचा रहे है। अब दूसरी तरह बढ़ते बिजली के दामों नए निवेशक अब पूरी तरह से मिहान से अपनी दुरी बना सकते है। उद्योग जगत पहले ही वैश्विक मंदी, टैरिफ, युद्ध और घटती मांग के बीच दबाव में हैं। ऐसे समय बिजली की कीमत बढ़ने का सीधा असर मौजूदा और नए निवेशकों पर पड़ने की पूरी संभावना है।

घाटे की भरपाई का बोझ उद्योगों पर : एमएडीसी अपनी नुकसान भरपाई का बोझ सीधा उद्योगों पर डाल रही है। इसके लिए एमएडीसी ने बिजली टैरिफ को अपना हथियार बनाया है। एमएडीसी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए बिजली टैरिफ में क्रमश: 9.15 प्रतिशत और 8.88 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। उसने यह प्रस्ताव महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है। कंपनी का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 तक का राजस्व घाटा वसूलने के लिए टैरिफ में बदलाव जरूरी है। प्रस्ताव के अनुसार औद्योगिक, व्यावसायिक और ईवी चार्जिंग उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में चरणबद्ध वृद्धि होगी।

आखिर नए निवेशक कैसे आएंगे कैसे ? : बिजली दर बढ़ाने से मिहान के उद्योगों को कई गंभीर परिणामो का सामना करना पड़ेगा। मौजूदा समय में ही मिहान में कार्यरत उद्योग आर्थिक मंदी की मार झेल रहा है। अमेरिकी टैरिफ, मध्य-पूर्व तनाव के चलते पहले ही उत्पादन पर बुरी तरफ से असर पड़ा है। निर्यात और उत्पादन पूरी तरफ से ठप है। इस मुश्किल घडी में उद्योगों को राहत देने के बजाए उनपर बिजली का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। आज भी मिहान में कई औद्योगिक भूखंड खाली पड़े हैं। मिहान की कुल 2249 हेक्टेयर भूमि में से अब तक 1298 हेक्टर जमीन पर ही उद्योगों का परिचालन शुरू है। जबकि बची 951 हेक्टेयर अब भी खाली है। बीते पांच वर्षों में मिहान में न तो कोई बड़ा निवेश आया और न ही कोई नया उद्योग शुरू हुआ। हालांकि इस दौरान घोषणा खूब हुई पर यह केवल कागजों तक ही सीमित रही। समय उद्योगों को राहत देने के बजाय बिजली महंगी करना गलत संदेश देगा।

जनसंपर्क अधिकारी ने नहीं दिया जवाब : मिहान में बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर एमएडीसी का पक्ष जानने के लिए जनसंपर्क अधिकारी एकता येदलवार से कई बार मोबाइल पर संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। मैसेज भेजने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। ऐसे में उद्योगों पर बढ़ने वाले आर्थिक बोझ से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर एमएडीसी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका।

प्रस्ताव पर विचार हो : हम महंगी बिजली के लिए तैयार नहीं हैं। एमएडीसी को अपने प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए। मिहान के उद्योग पहले से वैश्विक बाजार की अनिश्चितता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर टैरिफ के असर और लगातार बढ़ती उत्पादन लागत का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद थी। बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव चिंता बढ़ाने वाला है। इससे उत्पादन लागत और बढ़ेगी, उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी। नए निवेशकों के लिए मिहान का आकर्षण भी कम हो सकता है। मनोहर भोजवानी, अध्यक्ष, मिहान इंडस्ट्रीज एसोसिएशन


Created On :   7 July 2026 3:35 PM IST

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