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रजिस्ट्रेशन घोटाला: एक भी ट्रक बरामद नहीं कर सकी पुलिस, ग्रामीण आरटीओ के फर्जी आरसी बुक घोटाले की परतें और गहराईं

Nagpur News. बहुचर्चित ग्रामीण आरटीओ के कथित 450 करोड़ रुपए के फर्जी आरसी बुक और चोरी के ट्रकों के रजिस्ट्रेशन घोटाले में जांच नए मोड़ पर पहुंच गई है। मामले में कपिलनगर थाने में नामजद आरोपी मोहम्मद एजाज उर्फ गुड्डू अब्दुल रहमान और अब्दुल आसिफ अब्दुल कादिर (अकोला) ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कपिलनगर थाने के वरिष्ठ थानेदार सतीश आडे ने कहा है कि दोनों की जमानत का पुरजोर विरोध किया जाएगा, क्योंकि पूरे सिंडिकेट की परतें खोलने के लिए उनकी गिरफ्तारी जरूरी है। हालांकि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस अब तक न तो किसी आरोपी को गिरफ्तार कर सकी है और न ही एक भी चोरी का ट्रक बरामद हुआ है।
बिचौलियों की भी जांच तेज : सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में खरगोश, बंटी, पिंटू, संधु, गुल्लू, गुड्डू, मूलतानी, कलोर, साहनी, शंभू, अरोरा, ढिल्लन और पवन समेत कई कथित बिचौलियों की भूमिका सामने आई है। चर्चा है कि यही नेटवर्क फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न राज्यों के आरटीओ कार्यालयों के जरिए चोरी के ट्रकों को वैध बनाता था। आर्थिक तंगी से जूझ रहे ट्रक मालिकों को वाहन बेचने या बीमा क्लेम का झांसा देकर ट्रक हासिल किए जाते, फर्जी कागजात तैयार होते और बाद में चोरी की रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती। इसके बाद ट्रकों को मध्यप्रदेश के देवास से लेकर नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश तक ले जाकर इंजन और चेसिस नंबर बदल दिए जाते, नई पंचिंग कर फर्जी आरसी बुक तैयार कर उन्हें दोबारा बाजार में उतार दिया जाता था। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका है।
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दर्ज पते ही फर्जी निकले
गौरतलब है कि मामले में कपिलनगर थाने में आरोपी मो. हुसैन मो. इस्माइल, दिनेश कुमार ओमप्रकाश (दोनों सावनेर), एजाज उर्फ गुड्डू और अब्दुल आसिफ के खिलाफ अपराध दर्ज हैं। पुलिस जब अकोला में आरोपियों की तलाश में पहुंची तो एफआईआर में दर्ज पते ही फर्जी निकले, जिससे शुरुआती कार्रवाई ही निष्फल बताई जा रही है। इस बीच कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने मुंबई स्थित विधानसभा में परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से जांच कराने की जानकारी देते हुए अकोला के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रवींद्र भुयार, योगेश मोरे और मोटर वाहन निरीक्षक आनंद मोड को अवकाश पर भेजने की जानकारी दी।
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गुल्लू और गुड्डू चर्चित नाम रहा
सबसे ज्यादा चर्चा ‘गुल्लू' और गुड्डू के नाम की रही है। इसमें गुल्लू नामक कथित मास्टरमाइंड की भूमिका गहराई तक रही है, जो हत्या के प्रयास के एक पुराने मामले में भी आरोपी है, लेकिन करीब 18 महीने से फरार है, उसे अभी तक पुलिस पकड नहीं सकी है, उसके खिलाफ कपिलनगर थाने में ही यह मामला दर्ज है। सूत्रों का दावा है कि आरटीओ कार्यालयों में उसकी गहरी पैठ थी। वहीं शंभू और पवन पर भी वाहनों से अवैध वसूली और फर्जी रजिस्ट्रेशन में भूमिका को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
अब समन्वय पर पूरी नजर
पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल जांच एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर है। ग्रामीण आरटीओ अधिकारियों ने अनियमितताओं का खुलासा कर कई एफआईआर दर्ज कराईं, लेकिन साक्ष्य जुटाने और संयुक्त जांच में अपेक्षित तालमेल नहीं दिखा। एसआईटी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा करते हुए कहा कि पूर्व आरटीओ अधिकारियों से अपेक्षित सहयोग मिलता तो कई अधिकारी अब तक जेल पहुंच चुके होते। अब सबकी नजर आरोपियों की गिरफ्तारी पर है। जब तक कथित मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, तब तक कथित 450 करोड़ के इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आना बाकी है।
Created On :   12 July 2026 5:22 PM IST











