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Panna News: आमा रोपणी में सहेजी जा रही हैं विलुप्त होती दुर्लभ औषधियां

Panna News: प्रकृति के अनमोल खजाने को सहेजने और लुप्त होती औषधीय विरासतों को पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ पन्ना जिले के शाहनगर स्थित केन नदीं के तट पर आमा रोपणी एक नई इबारत लिख रही है। यहाँ मध्य प्रदेश की उन दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों को नया जीवन दिया जा रहा है जो कभी जंगलों की पहचान हुआ करती थीं लेकिन अब विलुप्ति की कगार पर हैं।
महाभारत कालीन शल्यकर्णी से लेकर दहीमन तक का संरक्षण
वन विभाग का अमला दिन-रात इन पौधों के संवर्धन में जुटा है। रोपणी में विशेष रूप से उन पौधों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और चरक संहिता में मिलता है। शल्यकर्णी कर्कट महाभारत कालीन यह पौधा अपने अद्भुत घाव भरने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। दहीमन इसे आदिवासी क्षेत्रों में संजीवनी माना जाता है। मान्यता है कि यह कैंसर के शुरुआती लक्षणों और किडनी रोगों में रामबाण है। इसके पत्तों में नशा उतारने का जादुई गुण भी पाया जाता है।
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अन्य दुर्लभ प्रजातियां
इसके अलावा मैदा वृक्ष, सोनपाठा, गरुड़ वृक्ष, कल्पवृक्ष, गदहा पलाश, कुल्लू और हल्दू जैसी संवेदनशील प्रजातियों को यहाँ वैज्ञानिक पद्धति से विकसित किया जा रहा है।
समर्पित टीम और उचित प्रबंधन
आमा रोपणी की प्रभारी श्रीमती मुक्ता रैकवार के नेतृत्व में सहायक अमित रैकवार, सुरक्षा श्रमिक सहदेव बर्मन और करीब तीन दर्जन मजदूरों की टीम इन पौधों की देखरेख में जुटी है। पौधों की सुरक्षा और सिंचाई के लिए यहाँ विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि भविष्य के लिए इन औषधीय संपदाओं को सुरक्षित रखा जा सके।
वास्तु और राशियों से भी जुड़ाव
यहाँ न केवल औषधीय बल्कि ज्योतिषीय महत्व वाले पौधे भी उपलब्ध हैं। वास्तु दोष निवारण और विभिन्न राशियों के अनुकूल पौधों का संग्रह कर आम जनमानस को प्रकृति से जोडऩे की अनूठी पहल की गई है।
इनका कहना है
हमारा लक्ष्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और पर्यावरण को बचाना है। नर्सरी में औषधीय, फलदार और इमारती पौधे सरकारी दरों पर उपलब्ध हैं। मेरा कृषकों और आम जनता से आग्रह है कि वह इन पौधों को अपने खेतों और बगीचों में रोपें ताकि हम मिलकर प्रदूषण मुक्त और स्वस्थ भविष्य का निर्माण कर सकें।
श्रीमती मुक्ता रैकवार, प्रभारी आमा रोपणी शाहनगर
Created On :   30 March 2026 4:14 PM IST














