US-Cuba Tension: भीषण ऊर्जा संकट से जूझ रहे क्यूबा को मिली राहत, रूस ने भेजा 1 लाख मीट्रिक टन तेल, अमेरिका ने लगा रखे हैं प्रतिबंध

भीषण ऊर्जा संकट से जूझ रहे क्यूबा को मिली राहत, रूस ने भेजा 1 लाख मीट्रिक टन तेल, अमेरिका ने लगा रखे हैं प्रतिबंध
अमेरिका के लगाए प्रतिबंध के चलते भीषण ऊर्जा किल्लत झेल रहे क्यूबा को राहत मिली है। रूस का एक तेल टैंकर 'अनातोली कोलोडकिन' एक लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर क्यूबा पहुंच गया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के लगाए प्रतिबंध के चलते भीषण ऊर्जा किल्लत झेल रहे क्यूबा को राहत मिली है। रूस का एक तेल टैंकर 'अनातोली कोलोडकिन' एक लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर क्यूबा पहुंच गया है। रूसी परिवहन मंत्रालय की ओर से इसकी पुष्टि की गई है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते क्यूबा में दूसरे देश से एक तेल का टैंकर नहीं पहुंचा था।

ट्रंप ने दी थी टैरिफ की धमकी

इस साल की शुरूआत में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरौ को सत्ता से बेदखल करने के बाद क्यूबा के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया था। उसने वेनेजुएला से क्यूबा को दिया जाने वाले तेल पर पाबंदी लगा दी थी। इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी भी दी थी कि यदि कोई देश क्यूबा को तेल भेजेगा तो उस पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। उनकी इस चेतावनी से डरकर क्यूबा को सबसे ज्यादा तेल सप्लाई करने वाले मेक्सिको ने भी आपूर्ति पर रोक लगा दी थी। हाल ही में कोलंबिया से क्यूबा जा रहे ऑयल से भरे टैंकर को अमेरिका कोस्टगार्ड ने रोक लिया था।

क्यूबा में गहराया बिजली संकट

अमेरिका के इस एक्शन का क्यूबा पर साफ असर दिखाई दे रहा है। जनवरी से ही वहां तेल की सप्लाई बंद है, जिसके चलते पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो रही है। काला बाजार में पेट्रोल 35 डॉलर प्रति गैलन मिल रहा है। इसके साथ ही बिजली भी कट रही है, पूरे देश में बिजली की किल्लत हो रही है। हालात इतने बुरे हो गए हैं कि दवाईयां और खाना भी कम हो गया है।

ट्रंप ने क्यों बदला रुख?

इस बीच रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर हैरान करने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी देश क्यूबा को तेल सप्लाई करना चाहता है तो वो कर सकता है, अमेरिका को इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद रूस ने तेल से भरा जहाज क्यूबा की ओर भेजा। इस रूसी जहाज पहुंचने से भारी ऊर्जा संकट से जूझ रहे क्यूबा को भारी राहत मिलेगी।

अमेरिका और क्यूबा कैसे बने दुश्मन?

जब 1898 में क्यूबा स्पेन से आजाद हुआ था, तो उसका असली कंट्रोल अमेरिका के हाथ में चला गया था। अमेरिका से ही वहां की राजनीति, सेना और अर्थव्यवस्था नियंत्रित होती थी। वहां की जमीन, चीनी उद्योग और कारोबार में अमेरिका की कंपनियों का दबदबा था। साल 1959 में क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो ने अपने गोरिल्ला सैनिकों के साथ मिलकर क्यूबा के तानाशाह बतिस्ता को सत्ता से हटा दिया। इसमें अमेरिका ने ही उसका सपोर्ट किया था। सत्ता पर काबिज होते ही कास्त्रो ने देश में बड़े बदलाव किए। उसने देश में कम्युनिस्ट नीति लागू की। अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति जब्त कर ली और जमीन और उद्योग को कास्त्रो की सरकार के अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद अमेरिका ने बड़ा एक्शन लेते हुए क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। इसका असर क्यूबा की आर्थिक स्थिति पर बुरा पड़ने लगा। इसके जवाब में क्यूबा ने अमेरिका के कट्टर दुश्मन रूस से हाथ मिलाया। इसी कारण से अमेरिका और क्यूबा के संबंध समय के साथ और खराब होते चले गए।

Created On :   30 March 2026 4:27 PM IST

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