Israel-US-Iran War: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पूर्व RAW चीफ ने इस देश को किया सपोर्ट, भारत संग रिश्तों की अहमियत के लिए बताया दशकों पुराना इतिहास
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इजराइल-अमेरिका-ईरान में युद्ध जारी है। इसके चलते मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति बनी हुई है। युद्ध की वजह से खाड़ी देशों से दुनियाभर में निर्यात होने वाली गैस-तेल की सप्लाई ठप पड़ गई है। जिसका असर भारत में भी दिखने को मिल रहा है। इस बीच Research And Analysis Wing (RAW) के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत ने बड़ा बयान दिया है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अमरजीत सिंह दुलत ने कहा कि भारत के ईरान के साथ पुराने और मजबूत रिश्ते रहे हैं।
अमरजीत सिंह ने दुलत ने कहा, "हम हमेशा ईरान के साथ रहे हैं और हमारे संबंध काफी पुराने हैं।" इस दौरान उन्होंने इजराइल-अमेरिका-ईरान युद्ध में ईरान की जीत का दावा किया है। हालांकि, इस घटनाक्रम को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी अभी हो रहा है, वह चिंताजनक है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में उछाल का खतरा बना हुआ है, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है।
भारत-ईरान के बीच कैसे रहे हैं संबंध
बता दें, भारत और ईरान के बीच रिश्ते धीरे-धीरे मजबूत हुए हैं। दोनों देशों औपचारिक कूटनीतिक संबंध बनाए और समय के साथ सहयोग बढ़ाया है। साल 1950 से 1970 के दौर में ईरान का झुकाव अमेरिका की ओर था। हालांकि, इसका असर ईरान ने भारत पर नहीं पड़ने दिया। ईरान ने भारत के साथ अपने संबंध बनाए रखे। इस समय दोनों देशों के बीच संतुलन और समझ देखने को मिली। बता दें, 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई, जिसके बाद उसकी विदेश नीति में बड़ा बदलाव आया। इसके बाद भी भारत ने संतुलित नीति अपनाई। भारत ने एक तरफ ईरान के साथ अपने रिश्ते बनाए रखे और दूसरी तरफ पश्चिमी देशों के साथ भी संबंध जारी रखे। आधुनिक समय में भारत और ईरान के रिश्ते कई अहम क्षेत्रों में मजबूत हुए हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में ईरान भारत का बड़ा तेल सप्लायर रहा है। भारत अपनी जरूरतों के लिए लंबे समय तक ईरान से तेल लेता रहा है।
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कितना महत्वपूर्ण है चाबहार बंदरगाह?
बता दें, चाबहार बंदरगाह दोनों देशों के रिश्तों का अहम हिस्सा है। इस बंदरगाह के विकास के लिए भारत पूरा सहयोग दे रहा है। इसके जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा रास्ता मिलता है। इस मार्ग से पाकिस्तान को बायपास किया जा सकता है। साथ ही ये व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए International North-South Transport Corridor (INSTC) भी बहुत अहम है। यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है। ये भारत, ईरान और रूस को जोड़ता है और व्यापार को आसान बनाता है।
Created On :   19 March 2026 4:47 PM IST












