UP News: सत्तारूढ़ सरकार के मंत्रियों ने वन नेशन-वन इलेक्शन को देश हित में बताया, कांग्रेस ने कहा ये असंभव

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर उत्तरप्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक देश-एक चुनाव की तारीफ करते हुए इसे महत्वपूर्ण और देश हित में बताया है। उन्होंने कांग्रेस में आगे कहा जब देश आजाद हुआ तो लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक ही टाइम पर होते थे लेकिन कांग्रेस की जो संविधान विरोधी नीतियां रही हैं, उसमें कई सरकारों को अलग समय पर बर्खास्त करना शामिल था। फिर सरकारी खजाने से बेतहाशा पैसा, जो विकास के लिए, गरीब के लिए या किसान के लिए खर्च होना चाहिए, वह सारा चुनाव में खर्च होने लगा। इसके कारण से देश की प्रगति भी प्रभावित हुई। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वन नेशन-वन इलेक्शन का जो विजन तय किया गया है, हम इसका समर्थन करते हैं। 'एक देश-एक चुनाव' होना ही चाहिए।
सरकार में शामिल मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक राष्ट्र एक चुनाव को एक अच्छी पहल बताया, राजभर ने आगे कहा विकास के लिए यह मांग जरूरी है। विपक्ष भी मांग करता था और हम भी चाहते थे कि जब देश में 18 से अधिक उम्र का व्यक्ति वोटर्स है तो अलग-अलग वोटर लिस्ट क्यों? एक वोटर लिस्ट हो। इसी नाते 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की बात हो रही है।
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कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एक राष्ट्र, एक चुनाव' को लेकर कहा, "आज की तारीख में वर्तमान कानून और संविधान के अनुसार यह संभव नहीं दिखता है। अगर उन्हें एक राष्ट्रीय कानून संभव कराना है तो केंद्र सरकार की 21-22 राज्यों में जहां-जहां सरकार है, वे वहां से इस्तीफा दें। इसके बाद हम एक राष्ट्रीय चुनाव करा लेंगे।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 'एक देश-एक चुनाव' बिल पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक पर मीडिया से कहा निश्चित तौर पर ये देश के हित में नहीं है। हमारी जो संघीय व्यवस्था चली आ रही है उसका हम समर्थन करते हैं। उसी तरह से देश आगे बढ़ सकता है, बदलाव होना चाहिए लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पूरी तरह से परिवर्तन हो। वन नेशन-वन इलेक्शन में तमाम कमियां हैं, जिन्हें दूर करना पड़ेगा।
जबकि उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने 'एक देश-एक चुनाव' बिल पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक पर कहा, "यह एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक रही, हम सभी लोगों का स्वागत करते हैं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है। हमारे देश में आजादी के बाद 1952 से 1967 तक देश के सभी चुनाव एक साथ हुए थे। एक साथ चुनाव होने पर समय की बचत हुई और आर्थिक रूप से बार-बार चुनाव के कारण जो दबाव पड़ रहा है, उससे भी राहत थी। ये सब देखते हुए उचित है कि हमारे देश के भीतर 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के तहत लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ में हों।
Created On :   14 July 2026 3:11 PM IST









